Lapdog Indian Media: क्या भारत का मीडिया बिका हुआ है?

Lapdog Indian Media: मीडिया का मुख्य उद्देश्य सूचना और ज्ञान का प्रसार करना है। इसका केवल एक मात्र काम है लोगों तक सच पहुँचाना, हालाँकि इन दिनों भारत में मीडिया के मायने कुछ और ही है। आप को ऐसा सुनकर शायद अजीब लग रहा होगा, मगर ऐसा सिर्फ हमारा मानना नहीं है। ये हम अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना लोहा मनवाने वाली न्यूज़ एजेंसियों की बात कर रहे हैं।

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लोकतंत्र का चौथा पिलर कहे जाने वाला मीडिया काफी लम्बे समय से भारत सरकार की चाकरी करता नज़र आ रहा है। 4 जून 2018 को अल जज़ीरा ने अपनी वेबसाइट पर एक खबर पब्लिश की, आपकी जानकारी के लिए दें अल जज़ीरा दोहा में एक कतरी राज्य पोषित प्रसारक है।

जिसमे उन्होंने एक भारतीय न्यूज़ साईट कोबरा पोस्ट की बात की है। उस खबर में यह बताया गया है के कैसे कोबरा पोस्ट ने भारत के लगभग 27 मीडिया आउटलेट्स का स्टिंग ऑपरेशन के ज़रिये पर्दाफाश किया है। नरेंद्र मोदी की सरकार में मीडिया का ध्रुवीकरण अधिक चरम पर हो गया है; आवाजें अधिक तीखी होती हैं।

जहां इन दिनों दुनिया कोरोनावायरस की महामारी को झेल रही है, वही भारतीय मीडिया इसे अलग ही सांप्रदायिक रंग देने में लगी है, दिल्ली में तबलीगी जमात के चलते कोरोनावायरस के न जाने कितने ही केस आये है, तब्लीगी जमात का दिल्ली के कोरोना पीडितो में लगभग पचास प्रतिशत की हिस्सेदारी है। भारतीय मीडिया ने कोरोनावायरस को जिहादी वायरस का नाम दे दिया है, सरकार से इस महामारी में सवाल पूछने के बजाए ये आम जनता में धार्मिक ज़हर घोलने के काम कर रही है।

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18 फ़रवरी 2020 को अल जज़ीरा ने एक और न्यूज़ पब्लिश की जिसमे उन्होंने भारतीय न्यूज़ एंकर की एक नई नस्ल जो क्रूर, आक्रामक और अप्राप्य रूप से राष्ट्रवादी होने की बात की है। उन्होंने रिपब्लिक टीवी न्यूज़ चैनल के मालिक अर्नब गोस्वामी की भी बात की है, जिसमे उन्होंने अर्नब के प्रो गवर्नमेंट रवैय्ये की बात की है, कि कैसे वो चीखकर चिल्ला कर एंटी मुस्लिमस प्रचार प्रसार कर के मोदी सरकार की गुलामी कर रहा है।

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न्यू यॉर्क टाइम्स में 2 अप्रैल 2020 को छपी एक खबर के मुताबिक बताया गया है कि कैसे मोदी राज में भारतीय मीडिया बिलकुल भी अब स्वतंत्र नहीं रह गयी है। दरअसल ये खबर हिंदुस्तान एक राज्य केरल से जुडी थी, केरल भारत के सबसे अच्छे राज्यों में से एक है। केरल राज्य का एक लोकल न्यूज़ चैनल है मीडिया वन, बात 6 अप्रेल 2020 की है, वो हर रोज़ की तरह अपनी खबर प्रसारित कर रहा था की एक दम से कुछ टेक्निकल खराबी के चलते चैनल ऑफ एयर हो गया।

लेकिन यह कोई तकनीकी खराबी नहीं थी। भारत के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के एक आदेश से स्टेशन को काट दिया गया था। सरकार ने 48 घंटे के लिए चैनल को ब्लॉक करने का फैसला किया क्योंकि इसने फरवरी की सबसे बड़ी खबर को कवर किया था – नई दिल्ली में मुसलमानों पर भीड़ के हमले जो व्यापक अशांति में भड़क गए थे – एक तरह से जो “दिल्ली पुलिस और आरएसएस के लिए महत्वपूर्ण” लग रहा था।

आर.एस.एस. प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी भारतीय जनता पार्टी के करीबी संबंधों के साथ एक हिंदू-राष्ट्रवादी सामाजिक आंदोलन है। मीडिया वन के संपादक आर सुभाष ने कहा, “यह चौंकाने वाला था कि केंद्र सरकार ने ऐसा फैसला लिया।” “यह प्रेस की स्वतंत्रता पर हमला था।”

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आप माने या न माने लेकिन सत्य यही है, पिछले कुछ सालों में भारतीय प्रेस स्वतंत्रता की रैंकिंग्स गिरती ही जा रही है, मेरी सलाह मानें तो आप न्यूज़ चैनल देखना छोड़ दे और एक ज़िम्मेदार नागरिक की तरह खुद से चीज़ों को समझने की कोशिश करे, एक ज़िम्मेदार नागरिक वही होता है जो अपनी सरकार से सवाल पूछे न कि उसकी चाकरी करना शुरू कर दे। एक अमरीकन गायक जिम मॉरिसन का कहना है-““Whoever controls the media, controls the mind.” इसका मतलब है “जो भी मीडिया को नियंत्रित करता है, वह मन को नियंत्रित करता है।”

Lapdog Indian Media: क्या भारत का मीडिया बिका हुआ है? via @MasterMindUpdate
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